अब 2 साल में नहीं, 4 साल में पूरा होगी बीएड का कोर्स, अगले साल से लागू

Bareilly। नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन (NCTE) अगले साल से चार वर्ष का बीएड कोर्स लाने की कवायद में जुट गया है। इसको लेकर दिल्ली में कुछ दिन पहले एक महत्वपूर्ण मीटिंग भी हो चुकी है जिसमें शिक्षक बनाने के लिए वन कोर्स का खाका खींचने पर रणनीति बनी।  सरकार की मंशा के तहत NCTE प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों में शिक्षक बनने की योग्यता केवल बीएड करने जा रही है।

बीएड का कोर्स

बीएड प्राथमिक योग्यता

प्राइमरी में अब तक BTC और सेकेंडरी में शिक्षक बनने के लिए बीएड प्राथमिक योग्यता है। तीन साल पहले एक वर्ष के बीएड को खत्म कर बीएड दो वर्ष का कर दिया गया था। सफलतापूर्वक दो सेशन पूरे भी हो चुके हैं।

बीएड के अलावा BTC, BLED, DLED जैसे कई कोर्स चल रहे हैं जिनके जरिए शिक्षक बना जा सकता है। सरकार शिक्षक के लिए सिर्फ एक कोर्स चाहती है। इस अहम बदलाव को लेकर NCTE ने एक हाईपॉवर कमेटी बनाई है।

इसके चेयरमेन रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो। अनिल शुक्ल हैं। कमेटी में तमाम विश्वविद्यालयों के कुलपति सहित कई विशेषज्ञ भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि एक साल के बाद होने वाले बदलाव में शिक्षक बनने के लिए केवल बीएड ही होगा।

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BSC-बीएड और BA-बीएड जैसे कोर्स

बताया जा रहा है कि नए बदलाव के तहत प्राइमरी और सेकेंडरी में अलग-अलग बीएड कोर्स डिजाइन होंगे। प्राइमरी के लिए अलग बीएड करना होगा और सेकेंडरी के लिए अलग बीएड कोर्स होगा।

प्राइमरी और सेकेंडरी में साइंस ओर कला वर्ग के लिए दो ग्रुप होंगे। प्राइमरी में भी बीएससी बीएड और बीए बीएड तथा सेकेंडरी में भी बीएससी बीएड और बीए बीएड अलग अलग होंगे। कमेटी बीएड कोर्स का पूरा खाका खीचेंगी।
इसमें कोर्स से लेकर शिक्षकों की संख्या और शिक्षकों की क्वालीफिकेशन भी कमेटी तय हरेगी। इस संबंध में कमेटी के चेयरमेन प्रो। अनिल शुक्ल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मीटिंग में बीएड कोर्स को लेकर मंथन हुआ है। अभी कई चरण में बैठकें होनी हैं।

काफी शिक्षकों की नियुक्ति

4 वर्षीय बीएड कोर्स ओर वह भी सेकेंडरी के साथ प्राइमरी के लिए भी, काफी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी। हालांकि यह आसान नहीं होगा पर NCTE इसे लागू करेगी तो यह करना ही होगा।

यह व्यवस्था पूरे देश में बीएड कोर्स पर लागू होगी। 50 छात्रों पर दस शिक्षकों की तैनाती के साथ साइंस और आर्ट्स के अलग-अलग बीएड के लिए विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति भी बड़ी चुनौती होगी।

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