अभी अभी: हो गया ऐलान, कैराना उपचुनाव में बीजेपी ने इस महिला नेता को बनाया उम्मीदवार !

मेरठ। सत्तारूढ़ दल भाजपा ने कैराना उपचुनाव फतह के लिए राजनैतिक तानाबाना बुन लिया है। दिवंगत भाजपा सांसद हुकुम सिंह की पुत्री मृगांका सिंह के पार्टी चुनाव चिन्ह पर लड़ने के संकेत मिलने के बाद उन्होंने भी तैयारी शुरू कर दी है।

उपचुनाव

कांता कर्दम को कैराना फतह के लिए मैदान में उतारा

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पश्चिमी उप्र में कैंप किया हुआ है। उसके अलावा भाजपा ने नवनिर्वाचित राज्यसभा सांसद कांता कर्दम को भी कैराना फतह के लिए मैदान में उतारा है।

सांसद कांता कर्दम को गुरूवार को भाजपा सांसदों और पार्टी कार्यकर्ताओं के एक दिनी सांकेतिक उपवास और धरने के लिए शामली जिले की कमान सौंपी गई थी। भाजपा के इस पैंतरे को पश्चिमी यूपी में दलितों को भाजपा के खेमे में लाने की एक राजनैतिक चाल माना जा रहा है।

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मुस्लिम-दलित समीकरण जीत में निभाते हैं अहम रोल

कैराना में मुस्लिम और दलित समीकरण चुनावी जीत में अहम रोल निभाते है। पिछले चुनाव में भाजपा सांसद और दिवंगत नेता हुकुम सिंह ने कैराना में पलायन का मुद्दा छेड़कर चुनाव को गर्मा दिया था। जिस कारण चुनाव का ध्रुवीकरण हो गया था और हिन्दु-मुस्लिम दो खेमे में बंट गये थे। लेकिन इस उपचुनाव में परिस्थिति 2014 से बिल्कुल जुदा हैं।

कैराना में दलित वोटों को लुभाने के लिए चुनाव प्रचार

उपचुनाव लड़ने वाले हुकुम सिंह नहीं उनकी बेटी मृगांका सिंह हैं और दलित वोट भाजपा से नाराज चल रहा है। चूंकि कांता कर्दम भाजपा की दलित कोटे से सांसद हैं। इसलिए भाजपा ने अपनी इस दलित महिला सांसद को कैराना में दलित वोटों को लुभाने के लिए चुनाव प्रचार और दलितों के बीच पैठ बनाने के उद्देश्य से उतारा है।

हुकुम सिंह की राजनैतिक विरासत उनकी पुत्री

यही कारण था कि यहां का चुनाव पश्चिमी उप्र के लिए बड़ा दिलचस्पी वाला होता है। वर्तमान में दोनों धुरंधर नेता दिवंगत हो चुके हैं। मुनव्वर हसन की तरफ से राजनैतिक विरासत उनके पुत्र नाहिद हसन ने संभाली है। नाहिद इस समय बसपा पार्टी में हैं और हुकुम सिंह की राजनैतिक विरासत उनकी पुत्री मृगांका सिंह संभालने की तैयारी कर रही हैं।

 

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