यूपी बोर्ड में बड़ा फेरबदल, अब हाईस्कूल-इन्टर में लागू होगा NCERT पाठ्यक्रम

लखनऊ. माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) अप्रैल से शुरू होने वाले सत्र में NCERT पाठ्यक्रम लागू कर रहा है। इसके बाद वर्ष 2019 की HIGHSCHOOL और INTEREDIATE के सभी विषयों की एक-एक परीक्षा होगी। ऐसा होने पर HIGHSCHOOL की परीक्षाएं 10 से 12 दिन में जबकि INTEREDIATE की परीक्षाएं अधिकतम 15 दिन में पूरी हो जाएंगी।

यूपी बोर्ड में बड़ा फेरबदल, अब हाईस्कूल-इन्टर में लागू होगा NCERT पाठ्यक्रम

इसमें नौंवी और 11वीं के प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे

इसका फायदा INTEREDIATE के विद्यार्थियों को ज्यादा होगा। उन्हें एक ही प्रश्न पत्र के लिए तैयारी करनी होगी। खास यह कि इसमें नौंवी और 11वीं के प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे। 10वीं और 12वीं जो पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, बोर्ड परीक्षा में उसी से संबंधित सवाल शामिल किए जाएंगे, जबकि अभी तक बोर्ड परीक्षा में नौवीं और 11वीं के भी पाठ्यक्रम को शामिल करके प्रश्न पत्र तैयार होते हैं। नए शैक्षिक सत्र के लिए NCERT की किताबों का प्रकाशन भी शुरू हो गया है और यह किताबें मार्च के अंत तक बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी।

यूपी बोर्ड ने नौवीं से 12 तक कुल 18 विषयों की 31 किताबों को NCERT पाठ्यक्रम के तहत तैयार कराया है। नौंवी में विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, 10वीं में विज्ञान एवं गणित, 11वीं में गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, अर्थशास्त्र, नागरिक शास्त्र, भूगोल, समाजशास्त्र एवं इतिहास तथा 12वीं में गणित, भौतिक विभाग, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान को शामिल किया गया है। इस विषयों के साथ इंटर के अन्य सभी विषयों का भी एक-एक प्रश्न पत्र तैयार होगा।

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70 की लिखित, 30 अंकों की प्रायोगिक परीक्षा

NCERT का पाठ्यक्रम लागू होने के बाद HIGHSCHOOL और INTEREDIATE के सभी विषयों की सौ-सौ अंकों की एक-एक परीक्षा होगी। संगीत और कंप्यूटर को छोड़कर शेष विषयों की लिखित परीक्षा 70 अंक की जबकि प्रायोगिक परीक्षा 30 अंकों की होगी। संगीत की लिखित एवं प्रायोगिक परीक्षा 50-50 अंक की तथा कंप्यूटर की लिखित परीक्षा 60 एवं प्रायोगिक परीक्षा 40 अंक की होगी।

 

INTEREDIATE में हर विषय के दो प्रश्न पत्र की परीक्षा

अभी तक HIGHSCHOOL में सभी विषयों की एक-एक परीक्षा होती है जबकि INTEREDIATE में हर विषय के दो प्रश्न पत्र की परीक्षा होती है। लिखित परीक्षा 35-35 अंक की जबकि प्रायोगिक परीक्षा 30 अंक की होती है लेकिन अगले वर्ष ऐसा नहीं होगा। इससे फायदा यह होगा कि कॉपियों का मूल्यांकन भी काफी कम समय में पूरा हो जाएगा और परिणाम भी काफी जल्दी घोषित किया जा सकेगा।

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